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Global Teacher Prize 2026:  भारत के तीन शिक्षक टॉप-50 शॉर्टलिस्ट में शामिल

Global Teacher Prize 2026:  भारत के तीन शिक्षकों को ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये) का होता है। इन तीनों शिक्षकों का नाम टॉप 50 शॉर्टलिस्ट में शामिल किया गया है। ग्लोबल टीचर प्राइज के भारतीय मूल के संस्थापक सन्नी वर्की ने भारतीय नॉमिनी के बारे में कहा कि ग्लोबल टीचर प्राइज एक साधारण मिशन के साथ बनाया गया था: आप जैसे शिक्षकों पर रोशनी डालना - ऐसे शिक्षक जिनका समर्पण, रचनात्मकता और करुणा दुनिया के साथ साझा करने और जश्न मनाने लायक है। उन्होंने कहा, "शिक्षक दिमाग को आकार देते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, और ऐसे दरवाजे खोलते हैं जिनके माध्यम से युवा लोग अपने और दूसरों के लिए उज्जवल भविष्य बनाते हैं। आपका काम क्लासरूम से कहीं आगे तक फैला हुआ है - यह जीवन को छूता है और दुनिया को आकार देता है।     ये तीन शिक्षक हैं: सुधांशु शेखर पांडा - मेरठ के एक स्कूल में शिक्षक हैं। महराज खुरशीद मलिक - जम्मू और कश्मीर के शिक्षक हैं। रूबल नागी - जो पूरे भारत में झुग्गियों और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के लिए काम कर रही हैं।   139 देशों से 5,000 से अधिक नामांकन यूके स्थित वर्की फाउंडेशन द्वारा आयोजित GEMS एजुकेशन वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता, जो संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के सहयोग से आयोजित की जाती है, को अपने 10वें संस्करण के लिए 139 देशों से 5,000 से अधिक नॉमिनेशन मिले। ग्लोबल टीचर प्राइज के भारतीय मूल के संस्थापक सन्नी वर्की ने भारतीय नॉमिनी के बारे में कहा, "ग्लोबल टीचर प्राइज एक साधारण मिशन के साथ बनाया गया था: आप जैसे शिक्षकों पर रोशनी डालना – ऐसे शिक्षक जिनका समर्पण, रचनात्मकता और करुणा दुनिया के साथ साझा करने और जश्न मनाने लायक है। उन्होंने कहा, "शिक्षक दिमाग को आकार देते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, और ऐसे दरवाजे खोलते हैं जिनके माध्यम से युवा लोग अपने और दूसरों के लिए उज्जवल भविष्य बनाते हैं। आपका काम क्लासरूम से कहीं आगे तक फैला हुआ है - यह जीवन को छूता है और दुनिया को आकार देता है।"

एक महीने Ago
Odisha: पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में बड़ा इजाफा!

Odisha: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सोमवार को राज्य के सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कॉलेजों में पढ़ रहे स्नातकोत्तर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में भारी वृद्धि की घोषणा की। स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों के वजीफे में 55 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले उनका मासिक वजीफा 31,000 रुपये था, जो अब बढ़कर 48,000 रुपये हो गया है। द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए यह 32,000 रुपये से बढ़कर 52,000 रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह 62 प्रतिशत की वृद्धि है।   तीसरे वर्ष के PG छात्रों और हाउस सर्जनों के वजीफे में भी बड़ा इजाफा   तीसरे वर्ष के छात्रों के लिए वजीफा 33,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जो 67 प्रतिशत की वृद्धि है।   मुख्यमंत्री ने बताया कि नया वजीफा 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।   सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के हाउस सर्जनों का वजीफा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि यह वृद्धि इस वर्ष 1 अगस्त से प्रभावी होगी।   वजीफे में वृद्धि को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि अब छात्र शिक्षा और रोगी देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेंगे।

एक महीने Ago
Yamuna Expressway Accident: कोहरे के चलते कई वाहन टकराए, बसें जलकर खाक

Yamuna Expressway Accident: मथुरा में दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के भीषण हादसा हो गया। घने कोहरे में सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं। इसके बाद वाहनों में आग लग गई। सूचना पाते ही इलाके की पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर पहुंच गया। छह लोगों के मरने की खबर है और 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने चार लोगों के मरने की पुष्टि की है। देर रात हुए हादसे के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर राहत-बचाव कार्य के लिए 11 फायरबिग्रेड की गाड़ियों के अलावा 14 एम्बुलेंस भेजी गई। दमकल कर्मियों द्वारा आग पर काबू पा लिया गया है, वहीं एक्सप्रेसवे के इस हिस्से में यातायात को अस्थायी रूप से रोका गया है। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, पहले एक दुर्घटना हुई, जिसके बाद तीन से छह बसों में आग लग गई। हादसे के समय बसें पूरी तरह भरी हुई थीं और सभी सीटों पर यात्री मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह हादसे के वक्त सो रहा था। अचानक जोरदार आवाज के साथ आग फैल गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे पर एसएसपी मथुरा श्लोक कुमार ने बताया कि सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं, जिससे सभी वाहनों में आग लग गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत एवं बचाव कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं, मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिए गए।

एक महीने Ago
MAHARASTRA : महाराष्ट्र के वर्धा में फिल्म ‘सारी सारजोम’ की हुई स्क्रीनिंग

MAHARASTRA : महाराष्ट्र के वर्धा जिले के सेवाग्राम नयी तालीम समिति में आदिवासी शिक्षा नेटवर्क की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में मानसिंह बास्के की फिल्म ‘सारी सारजोम’ की स्क्रीनिंग की गयी. इस कार्यक्रम में देशभर से आदिवासी शिक्षा और समाज के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता और विशेषज्ञ इकट्ठा हुए थे. फिल्म ‘सारी सारजोम’ में आदिवासी जीवन और उनके संघर्षों को चित्रित किया गया है. इसका निर्देशन पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षित मानसिंह बास्के ने किया है. फिल्म की कहानी झारखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकार की लड़ाई को दर्शाया गया है. इसमें एक आदिवासी व्यक्ति को दिखाया गया है, जो सिस्टम के जाल में फंसकर अपनी पहचान और अधिकार को बचाने के लिए संघर्ष करता है.   गुड़ाबांदा के बेनागाडिया गांव के रहने वाले हैं मानसिंह बास्के लेखक और निर्देशक मानसिंह बास्के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा के बेनागाडिया गांव के रहने वाले हैं. भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ), पुणे से निर्देशन में प्रशिक्षित हैं. वर्तमान में वह मुंबई और झारखंड दोनों जगह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. वह अब तक सात शॉर्ट फिल्में और तीन डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं. मानसिंह वर्तमान में एक संताली फीचर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं. फिल्म ‘सारी सारजोम’ के सिनेमेटोग्राफर सायन मोदक, एडिटर राज आनंद और सह-लेखक विदित होरो सभी झारखंड से हैं. फिल्म की साउंड रिकॉर्डिंग और डिजाइन युगल शर्मा और आर्ट डायरेक्टर अर्पित नाग और रॉबिन थापा ने किया है. ये सभी पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी रहे हैं. फिल्म के मुख्य कलाकारों में अनुराग लुगुन, सुकुमार टुडू, रेणुका दफ्तरदार, कैलाश, धर्मेंद्र और हर्ष प्रमुख हैं.   आदिवासियों की आवाज है ‘सारी सारजोम’ मानसिंह बास्के आदिवासी सिनेमा को पहचान दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने अपनी फिल्म ‘सारी सारजोम’ के जरिये आदिवासियों की समस्याओं और संघर्षों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की है. यह फिल्म न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समुदाय की आवाज को उठाती है. मानसिंह बास्के का कहना है कि वे अपनी फिल्मी कहानियों के माध्यम से आदिवासियों के अधिकारों और उनकी जीवनशैली को लोगों के सामने लाते हैं. आज आदिवासी समाज विभिन्न समस्याओं से चौतरफा घिर गया है. ऐसे में देश व दुनिया के सामने उनके जीवन, संस्कृति, रहन-सहन आदि के बारे में बताना जरूरी हो गया है, ताकि लोग उनकी स्थिति को जान व समझ सकें.

एक महीने Ago
मनोरंजन
यहां के सिने कलाकार काफी मेहनती व फिल्म की बारीकी को गहराई समझते हैं: राहुल राय

JNFF FILM FESTIVAL : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित एक्सएलआरआई ऑडिटोरियम में शनिवार को झारखंड नेशनल फिल्म फेस्टिवल (जेएनएफएफ-2025) का रंगारंग समापन समारोह आयोजित किया गया. सतरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, तालियों की गूंज और फिल्मी चमक के बीच पुरस्कार वितरण के साथ समापन हुआ. सिने महोत्सव में बॉलीवुड के अभिनेता और आशिकी फेम राहुल राय की विशेष मौजूदगी, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया. राहुल राय ने नेशनल, इंटरनेशनल, नेशनल म्यूजिक वीडियो, नेशनल शॉर्ट फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, झारखंड शॉर्ट फिल्म और झारखंड म्यूजिक वीडियो एलबम सहित विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को अपने हाथों से सम्मानित किया. इस अवसर पर उन्होंने जमशेदपुर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह शहर केवल टाटा स्टील के कारण ही नहीं, बल्कि कलाकारों की प्रतिभा के कारण भी देश-दुनिया में पहचान बना चुका है. उन्होंने कहा कि यहां के कलाकार मेहनती हैं, सिनेमा की बारीकियों को गहराई से समझते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं. राहुल राय ने झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य फिल्मों के लिए एक खजाना है. जरूरत है तो बस इसकी खूबसूरती को कैमरे की नजर से कैद कर दुनिया के सामने पेश करने की. उन्होंने स्थानीय निर्माता-निर्देशकों से कहा कि वे बॉलीवुड की तर्ज पर यहां फिल्म निर्माण को बढ़ावा दें.   नागपुरी गायक नीतेश कच्छप ने अपने गीतों से मचाया धमाल नागपुरी गायक नीतेश कच्छप ने अपने जोशीले और लोकप्रिय गीतों से कार्यक्रम में जबरदस्त धमाल मचा दिया. जैसे ही वे मंच पर आये, युवाओं में उत्साह की लहर दौड़ गयी. उनके हर गीत पर दर्शक नाचते व झूमते रहे. नागपुरी धुनों और लोक रंग की मिठास ने सभी को अपनी ओर आकर्षित किया. खासकर युवाओं ने गीतों के साथ कदम मिलाकर खूब मस्ती की.   ट्राइबल मॉडल्स ने पारंपरिक आउटफिट में रैंप पर किया कैटवॉक आदिवासी पारंपरिक आउटफिट में सजे ट्राइबल मॉडल्स ने रैंप पर शानदार कैटवॉक कर दर्शकों का मन मोह लिया. पारंपरिक परिधानों की खूबसूरती, रंगों की विविधता और आदिवासी संस्कृति की झलक ने पूरे माहौल को खास बना दिया. ट्राइबल मॉडल्स ने आत्मविश्वास और आकर्षक अंदाज ग्लैमर का जबरदस्त तड़का लगाया. पारंपरिक आभूषण, सधी हुई चाल और मनमोहक मुस्कान ने प्रस्तुति को यादगार बना दिया. इंटरनेशल केटेगरी (फीचर फिल्म, शॉर्ट फिल्म व डॉक्यूमेंट्री)  बेस्ट शॉर्ट फिल्म ऑफ दी इयर- इक्कोज  बेस्ट डायरेक्टर (शॉर्ट फिल्म)- अक्षय गौरी (सिस्टर माइन) बेस्ट एक्टर (शॉर्ट फिल्म)- लोला मार्टिन (इक्कोज) बेस्ट एक्ट्रेस (शॉर्ट फिल्म)-मरियम मेरजी(डियर तुनिसिया) बेस्ट फीचर फिल्म ऑफ दी इयर-डेड मेंस स्वीच बेस्ट डायरेक्टर फीचर फिल्म-टॉप डवेर व मैरी हिनसन (ऑल माय ड्यूज आर पेड) बेस्ट एक्टर (फीचर फिल्म)-फ्रैंक बे (ऑल माय ड्यूज आर पेड) बेस्ट एक्ट्रेस (फीचर फिल्म)-एडरियाना पैज (डेड मेंस स्वीच) बेस्ट डॉक्यूमेंट्री- द कमिनो नेशनल फीचर फिल्म केटेगरी बेस्ट फिल्म ऑफ द ईयर- मां काली बेस्ट डायरेक्टर-स्पर्श शर्मा (यूएनएस)  बेस्ट एक्टर-मनोज शर्मा (बॉडी)  बेस्ट एक्ट्रेस-राइमा सेन (मां काली) बेस्ट नेगेटिव रोल- रॉय (मां काली) बेस्ट एडिटर-भवानी शंकर शर्मा (यूएनएस) बेस्ट सिनेमेटोग्राफी-विकास (बॉडी) बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर-जयंत नाथ (वाइड एंगल) बेस्ट प्लेबैक सिंगर मेल-जेबिन गर्ग (वाइड एंगल) बेस्ट प्लेबैक सिंगर फीमेल- कुप्पन बेस्ट जूरी मेंशन- ए रफ वर्क फिल्मस (बॉडी) .झारखंड शॉर्ट फिल्म केटेगरी बेस्ट फिल्म ऑफ द ईयर- ओलो: में बाबू बेस्ट डायरेक्टर- रोहित मार्डी (ओलो: में बाबू) बेस्ट एक्टर-श्याम सुंदर मुर्मू (ओलो: में बाबू) बेस्ट एक्ट्रेस-खुशी टुडू (ओलो: में बाबू) बेस्ट एडिटर- राकेश उरांव (सांग) बेस्ट सिनेमेटोग्राफी-अनुराग (सांग)  बेस्ट स्टोरी राइटर-रोहित मार्डी (ओलो: में बाबू)

Khoboriya दिसम्बर 14, 2025 0
Odisha: पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में बड़ा इजाफा!

Odisha: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सोमवार को राज्य के सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कॉलेजों में पढ़ रहे स्नातकोत्तर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में भारी वृद्धि की घोषणा की। स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों के वजीफे में 55 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले उनका मासिक वजीफा 31,000 रुपये था, जो अब बढ़कर 48,000 रुपये हो गया है। द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए यह 32,000 रुपये से बढ़कर 52,000 रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह 62 प्रतिशत की वृद्धि है।   तीसरे वर्ष के PG छात्रों और हाउस सर्जनों के वजीफे में भी बड़ा इजाफा   तीसरे वर्ष के छात्रों के लिए वजीफा 33,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जो 67 प्रतिशत की वृद्धि है।   मुख्यमंत्री ने बताया कि नया वजीफा 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।   सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के हाउस सर्जनों का वजीफा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि यह वृद्धि इस वर्ष 1 अगस्त से प्रभावी होगी।   वजीफे में वृद्धि को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि अब छात्र शिक्षा और रोगी देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेंगे।

लौहनगरी जमशेदपुर में ब्राउन शुगर का बढ़ता जाल, युवा पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित

JAMSHEDPUR : लौहनगरी जमशेदपुर, जो कभी अपनी औद्योगिक पहचान, अनुशासन और सांस्कृतिक विविधता के लिए जानी जाती थी, आज एक गंभीर सामाजिक संकट से जूझ रही है। हाल के दिनों में शहर में ब्राउन शुगर का प्रचलन जिस तेजी से बढ़ा है, उसने आम लोगों के साथ-साथ अभिभावकों और समाजसेवियों की चिंता बढ़ा दी है। यह नशा अब केवल वयस्कों या सीमित क्षेत्रों तक सिमटा नहीं रह गया है, बल्कि कम उम्र के बच्चे और किशोर भी इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवा, जो देश और समाज का भविष्य माने जाते हैं, नशे के इस दलदल में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। पहले जहां चोरी-छुपे कुछ इलाकों में इसका सेवन होता था, वहीं अब यह हर गली-मोहल्ले में खुलेआम फैल चुका है। हर बस्ती तक पहुंचा नशे का कारोबार शहर के बस्ती इलाकों से लेकर मुख्य बाजारों और सार्वजनिक स्थानों तक ब्राउन शुगर का नेटवर्क फैल चुका है। नशे के कारोबारी युवाओं की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें धीरे-धीरे इसकी लत लगा रहे हैं। शुरुआत में इसे मौज-मस्ती या तनाव दूर करने का साधन बताकर परोसा जाता है, लेकिन कुछ ही समय में युवक इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब दिन के उजाले में भी नशे की खरीद-बिक्री हो रही है। कई इलाकों में बच्चों का व्यवहार बदल गया है, वे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं और अपराध की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इससे न केवल परिवार टूट रहे हैं, बल्कि पूरे समाज की सामाजिक संरचना भी कमजोर हो रही है। अपराध और सामाजिक विघटन का कारण बनता नशा ब्राउन शुगर की लत केवल स्वास्थ्य के लिए ही घातक नहीं है, बल्कि यह अपराध को भी जन्म दे रही है। नशे की पूर्ति के लिए युवा चोरी, छिनतई और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। इससे शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी असर पड़ रहा है। कई मामलों में नशे के कारण पारिवारिक हिंसा, मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ब्राउन शुगर शरीर और मस्तिष्क दोनों को तेजी से नुकसान पहुंचाती है। इसका सेवन करने वाले युवाओं में अवसाद, चिड़चिड़ापन और हिंसक प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सरकार और प्रशासन से ठोस पहल की मांग इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार और प्रशासन की भूमिका बेहद अहम है। समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि केवल छापेमारी या गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए व्यापक रणनीति अपनाने की जरूरत है। नशे के कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ युवाओं के पुनर्वास और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया जाना चाहिए। साथ ही, खेल, कला और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को सकारात्मक दिशा में जोड़ा जा सकता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर इस लड़ाई को गंभीरता से लड़ें। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह नशा आने वाले वर्षों में शहर की पूरी पीढ़ी को खोखला कर देगा। युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

Yamuna Expressway Accident: कोहरे के चलते कई वाहन टकराए, बसें जलकर खाक

Yamuna Expressway Accident: मथुरा में दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के भीषण हादसा हो गया। घने कोहरे में सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं। इसके बाद वाहनों में आग लग गई। सूचना पाते ही इलाके की पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर पहुंच गया। छह लोगों के मरने की खबर है और 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने चार लोगों के मरने की पुष्टि की है। देर रात हुए हादसे के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर राहत-बचाव कार्य के लिए 11 फायरबिग्रेड की गाड़ियों के अलावा 14 एम्बुलेंस भेजी गई। दमकल कर्मियों द्वारा आग पर काबू पा लिया गया है, वहीं एक्सप्रेसवे के इस हिस्से में यातायात को अस्थायी रूप से रोका गया है। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, पहले एक दुर्घटना हुई, जिसके बाद तीन से छह बसों में आग लग गई। हादसे के समय बसें पूरी तरह भरी हुई थीं और सभी सीटों पर यात्री मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह हादसे के वक्त सो रहा था। अचानक जोरदार आवाज के साथ आग फैल गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे पर एसएसपी मथुरा श्लोक कुमार ने बताया कि सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं, जिससे सभी वाहनों में आग लग गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत एवं बचाव कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं, मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिए गए।

Global Teacher Prize 2026:  भारत के तीन शिक्षक टॉप-50 शॉर्टलिस्ट में शामिल

Global Teacher Prize 2026:  भारत के तीन शिक्षकों को ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये) का होता है। इन तीनों शिक्षकों का नाम टॉप 50 शॉर्टलिस्ट में शामिल किया गया है। ग्लोबल टीचर प्राइज के भारतीय मूल के संस्थापक सन्नी वर्की ने भारतीय नॉमिनी के बारे में कहा कि ग्लोबल टीचर प्राइज एक साधारण मिशन के साथ बनाया गया था: आप जैसे शिक्षकों पर रोशनी डालना - ऐसे शिक्षक जिनका समर्पण, रचनात्मकता और करुणा दुनिया के साथ साझा करने और जश्न मनाने लायक है। उन्होंने कहा, "शिक्षक दिमाग को आकार देते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, और ऐसे दरवाजे खोलते हैं जिनके माध्यम से युवा लोग अपने और दूसरों के लिए उज्जवल भविष्य बनाते हैं। आपका काम क्लासरूम से कहीं आगे तक फैला हुआ है - यह जीवन को छूता है और दुनिया को आकार देता है।     ये तीन शिक्षक हैं: सुधांशु शेखर पांडा - मेरठ के एक स्कूल में शिक्षक हैं। महराज खुरशीद मलिक - जम्मू और कश्मीर के शिक्षक हैं। रूबल नागी - जो पूरे भारत में झुग्गियों और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के लिए काम कर रही हैं।   139 देशों से 5,000 से अधिक नामांकन यूके स्थित वर्की फाउंडेशन द्वारा आयोजित GEMS एजुकेशन वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता, जो संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के सहयोग से आयोजित की जाती है, को अपने 10वें संस्करण के लिए 139 देशों से 5,000 से अधिक नॉमिनेशन मिले। ग्लोबल टीचर प्राइज के भारतीय मूल के संस्थापक सन्नी वर्की ने भारतीय नॉमिनी के बारे में कहा, "ग्लोबल टीचर प्राइज एक साधारण मिशन के साथ बनाया गया था: आप जैसे शिक्षकों पर रोशनी डालना – ऐसे शिक्षक जिनका समर्पण, रचनात्मकता और करुणा दुनिया के साथ साझा करने और जश्न मनाने लायक है। उन्होंने कहा, "शिक्षक दिमाग को आकार देते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, और ऐसे दरवाजे खोलते हैं जिनके माध्यम से युवा लोग अपने और दूसरों के लिए उज्जवल भविष्य बनाते हैं। आपका काम क्लासरूम से कहीं आगे तक फैला हुआ है - यह जीवन को छूता है और दुनिया को आकार देता है।"

MAHARASTRA : महाराष्ट्र के वर्धा में फिल्म ‘सारी सारजोम’ की हुई स्क्रीनिंग

MAHARASTRA : महाराष्ट्र के वर्धा जिले के सेवाग्राम नयी तालीम समिति में आदिवासी शिक्षा नेटवर्क की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में मानसिंह बास्के की फिल्म ‘सारी सारजोम’ की स्क्रीनिंग की गयी. इस कार्यक्रम में देशभर से आदिवासी शिक्षा और समाज के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता और विशेषज्ञ इकट्ठा हुए थे. फिल्म ‘सारी सारजोम’ में आदिवासी जीवन और उनके संघर्षों को चित्रित किया गया है. इसका निर्देशन पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षित मानसिंह बास्के ने किया है. फिल्म की कहानी झारखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकार की लड़ाई को दर्शाया गया है. इसमें एक आदिवासी व्यक्ति को दिखाया गया है, जो सिस्टम के जाल में फंसकर अपनी पहचान और अधिकार को बचाने के लिए संघर्ष करता है.   गुड़ाबांदा के बेनागाडिया गांव के रहने वाले हैं मानसिंह बास्के लेखक और निर्देशक मानसिंह बास्के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा के बेनागाडिया गांव के रहने वाले हैं. भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ), पुणे से निर्देशन में प्रशिक्षित हैं. वर्तमान में वह मुंबई और झारखंड दोनों जगह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. वह अब तक सात शॉर्ट फिल्में और तीन डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं. मानसिंह वर्तमान में एक संताली फीचर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं. फिल्म ‘सारी सारजोम’ के सिनेमेटोग्राफर सायन मोदक, एडिटर राज आनंद और सह-लेखक विदित होरो सभी झारखंड से हैं. फिल्म की साउंड रिकॉर्डिंग और डिजाइन युगल शर्मा और आर्ट डायरेक्टर अर्पित नाग और रॉबिन थापा ने किया है. ये सभी पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी रहे हैं. फिल्म के मुख्य कलाकारों में अनुराग लुगुन, सुकुमार टुडू, रेणुका दफ्तरदार, कैलाश, धर्मेंद्र और हर्ष प्रमुख हैं.   आदिवासियों की आवाज है ‘सारी सारजोम’ मानसिंह बास्के आदिवासी सिनेमा को पहचान दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने अपनी फिल्म ‘सारी सारजोम’ के जरिये आदिवासियों की समस्याओं और संघर्षों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की है. यह फिल्म न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समुदाय की आवाज को उठाती है. मानसिंह बास्के का कहना है कि वे अपनी फिल्मी कहानियों के माध्यम से आदिवासियों के अधिकारों और उनकी जीवनशैली को लोगों के सामने लाते हैं. आज आदिवासी समाज विभिन्न समस्याओं से चौतरफा घिर गया है. ऐसे में देश व दुनिया के सामने उनके जीवन, संस्कृति, रहन-सहन आदि के बारे में बताना जरूरी हो गया है, ताकि लोग उनकी स्थिति को जान व समझ सकें.

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ठंड बढ़ने से झारखंड में मौसम हुआ सर्द

झारखंड के कई जिलों में पिछुआ हवाओं के कारण ठंड में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, पिछुआ हवाएं उत्तर से उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं, जिनके कारण न्यूनतम तापमान में लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जिससे सुबह के समय काफी ठंडक बढ़ गई है। इस वर्ष सर्दी ने अपनी दस्तक समय से पहले दे दी है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही नवंबर के अंत से ठंड बढ़ने की चेतावनी दी थी। रातों में तापमान करीब 9 डिग्री तक गिर जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का असर महसूस किया जा रहा है।   राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को मौसम साफ और शुष्क रहा और मध्यम तेजी से हवा चली, जिससे ठंडी हवा का अनुभव हुआ। पिछले 24 घंटों में गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रांची में अधिकतम तापमान 24.6 और न्यूनतम 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि इस ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई का विशेष ख्याल रखा जाए ताकि वे प्रभावित न हों।   मौसम विभाग ने सूचना दी है कि बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे चक्रवात बनने की संभावना है। यह चक्रवात झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर असर डाल सकता है। इस कारण अगले दो दिनों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और बारिश या तेज हवाओं के चलते खेल आयोजन प्रभावित हो सकता है।राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अधिक महसूस होती है।

नवम्बर 27, 2025

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