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सीबीएसई: स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रति बढ़ाई जाएगी जागरूकता

Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) संबद्ध स्कूलों में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक सोशल मीडिया अभियान चलाएगा। इस पर 30 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड ने एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह राशि सामग्री निर्माण, प्रचार-प्रसार, डिजिटल विज्ञापन और अभियान प्रबंधन सहित सभी संबंधित गतिविधियों पर खर्च होगी। सीबीएसई की प्रबंध समिति की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। बैठक में कहा गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप व्यावसायिक-कौशल शिक्षा अनिवार्य किया है।इसके तहत कौशल शिक्षा और कौशल बोध गतिविधि पुस्तिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऑडियो-विजुअल सामग्री, लघु वीडियो, प्रशंसा पत्र, एनिमेशन तथा विभिन्न डिजिटल क्रिएटिव विकसित किए जाएंगे। बोर्ड की वित्त समिति ने इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद इसे स्वीकृति देने की सिफारिश की। इसके पश्चात प्रबंध समिति ने वित्त समिति की सिफारिशों का अनुमोदन करते हुए एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी।  

1 सप्ताह Ago
PREMSHILA HANSDAH:पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन, संताली सिनेमा जगत में शोक की लहर

PREMSHILA HANSDAH: संताली फिल्म जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन हो गया है। उनके चले जाने से न केवल संताली सिनेमा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रेमशिला हांसदा अपनी मधुर और जादुई आवाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने कई लोकप्रिय संताली एलबमों और फिल्मों में अपनी गायकी का लोहा मनवाया। अपनी अद्वितीय कला के दम पर उन्होंने झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अन्य आदिवासी बहुल राज्यों में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। इतनी कम उम्र में उनके निधन ने प्रशंसकों और साथी कलाकारों को झकझोर कर रख दिया है।   सिने जगत के कलाकारों और उनके चाहने वालों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर और 'मरांगबुरू से प्रार्थना की है कि उनकी पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान दें। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रेमशिला का जाना संताली संगीत के एक सुनहरे युग की अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले समय में नामुमकिन होगी। उनकी आवाज हमेशा उनके गीतों के माध्यम से जीवित रहेगी।

1 सप्ताह Ago
Mojtaba Khamenei: खामेनेई के बेटे मोजतबा बने ईरान के नए सर्वोच्च नेता

Mojtaba Khamenei: पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात किसी बारूद के ढेर से कम नहीं हैं। इस तनाव के बीच ईरान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया 'सुप्रीम लीडर' (सर्वोच्च नेता) चुन लिया गया है। यह फैसला न केवल ईरान के भविष्य के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति (Geopolitics) के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।   यहाँ इस पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. चुनाव और सत्ता का हस्तांतरण ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगाई है। मोजतबा के चुने जाने के पीछे सबसे बड़ी शक्ति ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना के भारी दबाव के कारण ही असेंबली ने यह फैसला लिया।   दिलचस्प बात यह है कि खुद अयातुल्ला अली खामेनेई ने पिछले साल अपने संभावित उत्तराधिकारियों की जो सूची बनाई थी, उसमें मोजतबा का नाम शामिल नहीं था। लेकिन इजरायल और अमेरिका के हालिया हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद स्थितियां तेजी से बदलीं और मोजतबा को नेतृत्व सौंपा गया।   2. कौन हैं मोजतबा खामेनेई? मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में ईरान के माशहद शहर में हुआ था। वह उस दौर में पले-बढ़े जब उनके पिता शाह के शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे।   बिना पद के प्रभाव: मोजतबा की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि उन्होंने कभी भी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला। इसके बावजूद, उन्हें ईरान की सत्ता के गलियारों में सबसे ताकतवर व्यक्तियों में से एक माना जाता रहा है।   युद्ध का अनुभव: उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया था। युद्ध के दौरान उनके परिवार के कई सदस्यों (पत्नी, बेटी, पोता आदि) की जान चली गई, लेकिन मोजतबा जीवित बचे रहे।   सैन्य संबंध: उनके संबंध IRGC के साथ बहुत गहरे हैं। यही कारण है कि आज संकट की घड़ी में सेना ने उन पर भरोसा जताया है।   3. धार्मिक और राजनीतिक विवाद मोजतबा का चयन ईरान की स्थापित परंपराओं के खिलाफ माना जा रहा है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:   वंशानुगत शासन का विरोध: 1979 की इस्लामी क्रांति का मूल आधार ही राजशाही और वंशवाद को खत्म करना था। ईरान खुद को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में पेश करता रहा है जहाँ योग्यता के आधार पर चयन होता है। अब पिता के बाद बेटे का चुना जाना इस विचारधारा पर सवाल उठाता है।   धार्मिक योग्यता की कमी: ईरान के सर्वोच्च नेता के लिए 'उच्च पदस्थ धार्मिक विद्वान' होना अनिवार्य माना जाता है। मोजतबा के पास वह धार्मिक दर्जा नहीं है जो उनके पिता या उनसे पहले के नेताओं के पास था।   4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और छवि साल 2019 में अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने मोजतबा पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि मोजतबा बिना किसी चुनाव या नियुक्ति के अपने पिता के कार्यालय का कामकाज संभाल रहे थे और एक अघोषित शासक की तरह व्यवहार कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें एक 'कट्टरपंथी' और 'पर्दे के पीछे से खेल खेलने वाला' नेता माना जाता रहा है।   5. पश्चिम एशिया पर प्रभाव मोजतबा के सर्वोच्च नेता बनते ही क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज हो गई है।   जवाबी हमले: अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।   कट्टर रुख: माना जा रहा है कि मोजतबा अपने पिता की तुलना में अधिक आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिससे इजरायल-ईरान संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है।

1 सप्ताह Ago
RANCHI: एआई क्रांति जीने, सोचने व काम करने के तरीकों में एक आमूलचूल परिवर्तन

JAMSHEDPUR: इतिहास के पन्नों को पलटें तो हम पाते हैं कि समय-समय पर ऐसी तकनीकें आती रही हैं जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा बदल दी—चाहे वह पहिए का आविष्कार हो, भाप का इंजन हो या इंटरनेट का आगमन। लेकिन आज हम जिस 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के दौर में जी रहे हैं, वह पहले की किसी भी क्रांति से कहीं अधिक तीव्र, व्यापक और प्रभावशाली है। यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह जीने, सोचने और काम करने के तरीकों में एक आमूलचूल परिवर्तन है। आज एआई हमारे जीवन के हर हिस्से में प्रवेश कर चुका है, और ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति, यानी युवा पीढ़ी, इस बदलाव के प्रति कितनी सजग है?   वर्तमान समय में युवाओं के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे एआई को एक चुनौती के बजाय एक महाशक्ति (Superpower) के रूप में देखें। अक्सर यह भय फैलाया जाता है कि मशीनें इंसान की जगह ले लेंगी, लेकिन कड़वा सच यह है कि एआई आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि वह व्यक्ति आपकी नौकरी ले लेगा जो एआई का बेहतर इस्तेमाल करना जानता है। इसलिए, आज के युवाओं को अपनी ऊर्जा और ध्यान का केंद्र केवल और केवल अपनी शिक्षा और करियर को बनाना चाहिए।   यहाँ शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि स्वयं को 'एआई-सक्षम' (AI-Ready) बनाना है। शिक्षा कभी बेकार नहीं जाती क्योंकि वह मानव मस्तिष्क को परिष्कृत करती है, लेकिन इस नए युग में शिक्षा का स्वरूप भी 'एआई युक्त' होना चाहिए। इसका मतलब है कि युवाओं को अपनी पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ डेटा विश्लेषण, एल्गोरिदम की समझ और डिजिटल साक्षरता को जोड़ना होगा। जब शिक्षा और तकनीक का यह मेल होगा, तभी युवा इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में न केवल टिक पाएंगे, बल्कि नेतृत्व भी कर पाएंगे। यह समय एकाग्रता का है, खुद को भविष्य के अनुकूल ढालने का है और अपनी मेधा को तकनीक के साथ संरेखित (Align) करने का है।   1. आधुनिक युग की मांग: एआई-युक्त शिक्षा आज वह समय बीत गया जब केवल किताबों को रटकर डिग्रियां हासिल करना काफी होता था। वर्तमान समय की मांग 'स्मार्ट लर्निंग' है। युवाओं को अपनी पारंपरिक शिक्षा में एआई को एक दुश्मन की तरह नहीं, बल्कि एक सहयोगी (Collaborator) की तरह शामिल करना चाहिए। एआई-युक्त शिक्षा का अर्थ है—जटिल विषयों को समझने के लिए डेटा का उपयोग करना, अपनी कमियों को पहचानने के लिए एआई टूल्स की मदद लेना और अपनी रचनात्मकता (Creativity) को तकनीक के साथ जोड़ना।   2. क्यों बेकार नहीं जाती शिक्षा? कहा जाता है कि "शिक्षा वह धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।" एआई के दौर में भी यह बात पूरी तरह सत्य है। एआई केवल वही कर सकता है जो उसे सिखाया गया है, लेकिन आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और समस्या समाधान (Problem Solving) केवल एक शिक्षित मानव मस्तिष्क ही कर सकता है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वह संस्कार और समझ है जो हमें मशीन से अलग बनाती है। आपकी पढ़ी हुई हर बात एआई को बेहतर निर्देश देने (Prompt Engineering) में काम आती है।   3. करियर के लिए एकाग्रता का महत्व आज के युवाओं के लिए भटकाव के साधन बहुत हैं, लेकिन करियर पर ध्यान केंद्रित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एआई हर उस काम को कर देगा जो दोहराव वाला (Repetitive) है। इसलिए, युवाओं को अपना ध्यान उन क्षेत्रों में लगाना चाहिए जहाँ भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) और रणनीतिक निर्णय की आवश्यकता होती है। जब आपका आधार मज़बूत होगा और आप अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहेंगे, तभी आप भविष्य की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे।   4. कौशल विकास (Skill Development) ही असली कुंजी है एआई के दौर में करियर बनाने के लिए युवाओं को तीन स्तरों पर काम करना होगा: अपस्किलिंग (Upskilling): अपने वर्तमान क्षेत्र में एआई टूल्स का उपयोग सीखें। री-स्किलिंग (Reskilling): भविष्य की बदलती जरूरतों के अनुसार नए हुनर सीखें। तकनीकी साक्षरता: कोडिंग न भी आए, तो भी एआई कैसे काम करता है, इसकी बुनियादी समझ होना अनिवार्य है।

1 सप्ताह Ago
आधुनिक भारत के निर्माता जेएन टाटा
देश
ट्राइबल इंडियन चैंबर ने आधुनिक भारत के निर्माता जेएन टाटा को नमन किया

JASHEDPUR: ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ( टिक्की ), झारखंड चैप्टर के द्वारा ट्राईबल कल्चर सेंटर, सोनारी में देश के दिग्गज उद्योगपति, आधुनिक भारत के निर्माता सह प्रेरणा स्रोत स्व: जेएन टाटा जी की 187वीं जयंती पर उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पणकर श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में टिक्की सदस्यगण मौजूद रहे. कार्यक्रम में टिक्की के प्रदेश अध्यक्ष वैद्यनाथ मांडी ने कहा कि स्व: टाटा जी आधुनिक भारत के निर्माता एवं प्रेरणा श्रोत हैl स्व: टाटा जी ने औद्योगिक क्रांति को एक नई जगह प्रदान की. प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोगों के लिए रोजगार के साधन बने. देश प्रेम की बात हो या सामाजिक सरोकार की दोनों में स्व: टाटा जी की सोच अव्वल रही. आदिवासी समाज उनके द्वारा किए गए अमूल्य कार्यों को कभी नहीं भूला सकती. कार्यक्रम में मुख्य रूप से बसंत तिर्की, राज मार्शल मार्डी, रंजन मार्डी, सुरेंद्र टुडू, चरण हांसदा, जोसेफ कांदिर, सौरव बेसरा,शंकर सेन महली,सूरज सोरेन, विजय गोंड, गगन सिंकू, विनोद माझी, गुलशन टुडू, बलराम सोरेन ,आकाश रंजन सोरेन,रामदास सोरेन इत्यादि मौजूद थे.

Khoboriya मार्च 3, 2026 0
Odisha: पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में बड़ा इजाफा!

Odisha: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सोमवार को राज्य के सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कॉलेजों में पढ़ रहे स्नातकोत्तर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में भारी वृद्धि की घोषणा की। स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों के वजीफे में 55 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले उनका मासिक वजीफा 31,000 रुपये था, जो अब बढ़कर 48,000 रुपये हो गया है। द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए यह 32,000 रुपये से बढ़कर 52,000 रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह 62 प्रतिशत की वृद्धि है।   तीसरे वर्ष के PG छात्रों और हाउस सर्जनों के वजीफे में भी बड़ा इजाफा   तीसरे वर्ष के छात्रों के लिए वजीफा 33,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जो 67 प्रतिशत की वृद्धि है।   मुख्यमंत्री ने बताया कि नया वजीफा 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।   सरकारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के हाउस सर्जनों का वजीफा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि यह वृद्धि इस वर्ष 1 अगस्त से प्रभावी होगी।   वजीफे में वृद्धि को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि अब छात्र शिक्षा और रोगी देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेंगे।

सीबीएसई: स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रति बढ़ाई जाएगी जागरूकता

Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) संबद्ध स्कूलों में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक सोशल मीडिया अभियान चलाएगा। इस पर 30 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड ने एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह राशि सामग्री निर्माण, प्रचार-प्रसार, डिजिटल विज्ञापन और अभियान प्रबंधन सहित सभी संबंधित गतिविधियों पर खर्च होगी। सीबीएसई की प्रबंध समिति की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। बैठक में कहा गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप व्यावसायिक-कौशल शिक्षा अनिवार्य किया है।इसके तहत कौशल शिक्षा और कौशल बोध गतिविधि पुस्तिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऑडियो-विजुअल सामग्री, लघु वीडियो, प्रशंसा पत्र, एनिमेशन तथा विभिन्न डिजिटल क्रिएटिव विकसित किए जाएंगे। बोर्ड की वित्त समिति ने इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद इसे स्वीकृति देने की सिफारिश की। इसके पश्चात प्रबंध समिति ने वित्त समिति की सिफारिशों का अनुमोदन करते हुए एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी।  

PREMSHILA HANSDAH:पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन, संताली सिनेमा जगत में शोक की लहर

PREMSHILA HANSDAH: संताली फिल्म जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पार्श्व गायिका प्रेमशिला हांसदा का असामयिक निधन हो गया है। उनके चले जाने से न केवल संताली सिनेमा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रेमशिला हांसदा अपनी मधुर और जादुई आवाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने कई लोकप्रिय संताली एलबमों और फिल्मों में अपनी गायकी का लोहा मनवाया। अपनी अद्वितीय कला के दम पर उन्होंने झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अन्य आदिवासी बहुल राज्यों में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। इतनी कम उम्र में उनके निधन ने प्रशंसकों और साथी कलाकारों को झकझोर कर रख दिया है।   सिने जगत के कलाकारों और उनके चाहने वालों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर और 'मरांगबुरू से प्रार्थना की है कि उनकी पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान दें। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रेमशिला का जाना संताली संगीत के एक सुनहरे युग की अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले समय में नामुमकिन होगी। उनकी आवाज हमेशा उनके गीतों के माध्यम से जीवित रहेगी।

JAMSHEDPUR: बारीडीह निवासी शंकर सोरेन 45 सालों से जला रहे मातृभाषा संताली की मशाल

JAMSHEDPUR: आज के इस हाई-टेक और एआई के दौर में जहां दुनिया की कई भाषाएं लुप्त हो रही हैं, वहीं जमशेदपुर का एक 76 वर्षीय बुजुर्ग 45 सालों से अपनी मातृभाषा की मशाल जलाए हुए है. हम बात कर रहे हैं बारीडीह माझी टोला निवासी शंकर सोरेन की. जो लोग उम्र को महज एक आंकड़ा मानते हैं, उनके लिए शंकर सोरेन एक जीवंत मिसाल हैं. 76 साल की उम्र में भी उनका अनुशासन और जज्बा किसी 25 साल के ऊर्जावान युवक जैसा है. शंकर सोरेन की दिनचर्या आज भी किसी मिशनरी की तरह है. वे सुबह एक ठोस वर्क प्लान के साथ जागते हैं और रात को सोने से पहले अगले दिन की कार्ययोजना पूरी करके ही चैन की सांस लेते हैं. उनके शब्दकोश में आराम शब्द के लिए कोई जगह नहीं है. वे मानते हैं कि जब तक शरीर में प्राण हैं, तब तक अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए काम करना ही जीवन है. शंकर सोरेन बड़े गर्व से कहते हैं कि मातृभाषा मां के दूध के समान है. यह उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने के योग्य बनाती है. अपनी पहचान बचानी है, तो अपनी भाषा को बचाना ही होगा.   लोगों से 2-2 रुपये चंदे लेकर साईकिल से डोर टू डोर करते थे प्रचार-प्रसार शंकर सोरेन बताते हैं कि मातृभाषा संताली के प्रचार-प्रसार के लिए वे लोगों से 2-2 रुपये की सहयोग राशि मांगते थे. इस छोटी सी राशि और बड़े हौसले के दम पर उनकी टीम ने संताली भाषा को पूरे कोल्हान में घर-घर तक पहुंचाया. शंकर सोरेन याद करते हैं कि कैसे वे और उनकी करीब 60 लोगों की टीम साइकिल पर सवार होकर पूरे कोल्हान का दौरा करती थी. घर-घर जाकर लोगों को संताली भाषा और ओलचिकी लिपि के प्रति जागरूक करना उनका मुख्य उद्देश्य था. उसी मुहिम के क्रम में शंकर सोरेन पिछले 10 वर्षों से आसेका झारखंड के महासचिव के रूप में योगदान दे रहे हैं. वे लगातार मातृभाषा संताली को एक नयी ऊंचाई देने का काम कर रहे हैं. वे बताते हैं उनके नेतृत्व में आसेका के बैनर तले हर साल लगभग 5000 लोग संताली भाषा में परीक्षा देते हैं. अब तक 50 हजार से अधिक लोग इस परीक्षा का हिस्सा बन चुके हैं. इस मुहिम की सबसे सुखद तस्वीर यह है कि परीक्षा देने वाले 5000 छात्रों में से लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं होती हैं. जो एक बड़े सामाजिक बदलाव है. क्योंकि यदि एक महिला शिक्षित होती है और अपनी मातृभाषा सीखती है, तो वह पूरी पीढ़ी को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ देती है.   पंडित रघुनाथ मुर्मू से मातृभाषा को बचाने की मिली प्रेरणा शंकर सोरेन के इस जुनून के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है. वे बताते हैं कि 1963 में बहरागोड़ा के कुटूसोल गांव में ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू आये थे. उस समय शंकर की उम्र मात्र 12 साल थी. पंडित मुर्मू जिस तरह ब्लैक बोर्ड पर तस्वीरें बनाकर संताली लिपि सिखा रहे थे. उससे वे काफी प्रभावित हुए और आज तक उनके मन पर गहरी छाप है. उसी दिन वे उनके अनुयायी बन गये और यह संकल्प लिया कि जीवन के अंतिम समय तक अपनी मातृभाषा की सेवा करेंगे.   नौकरी के साथ सामाजिक सेवा में बनायी अलग पहचान शंकर सोरेन के सफर की शुरुआत 1972 में हुई, जब महज 22 साल की उम्र में उन्होंने एलआईसी में क्लर्क के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी. बाद में वे एलआईसी ऑफिस जमशेदपुर में डेवलपमेंट ऑफिसर बने और 2010 में सेवानिवृत्त हुए. लेकिन उनकी असली पहचान नौकरी से इतर उनकी सामाजिक सक्रियता रही. 1978 में जब जमशेदपुर के टिनप्लेट के पास सामाजिक व शैक्षणिक संगठन आसेका का कार्यालय बना, तो शंकर सोरेन इसके सबसे सक्रिय सिपाही बनकर उभरे.  

RANCHI: एआई क्रांति जीने, सोचने व काम करने के तरीकों में एक आमूलचूल परिवर्तन

JAMSHEDPUR: इतिहास के पन्नों को पलटें तो हम पाते हैं कि समय-समय पर ऐसी तकनीकें आती रही हैं जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा बदल दी—चाहे वह पहिए का आविष्कार हो, भाप का इंजन हो या इंटरनेट का आगमन। लेकिन आज हम जिस 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के दौर में जी रहे हैं, वह पहले की किसी भी क्रांति से कहीं अधिक तीव्र, व्यापक और प्रभावशाली है। यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह जीने, सोचने और काम करने के तरीकों में एक आमूलचूल परिवर्तन है। आज एआई हमारे जीवन के हर हिस्से में प्रवेश कर चुका है, और ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति, यानी युवा पीढ़ी, इस बदलाव के प्रति कितनी सजग है?   वर्तमान समय में युवाओं के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे एआई को एक चुनौती के बजाय एक महाशक्ति (Superpower) के रूप में देखें। अक्सर यह भय फैलाया जाता है कि मशीनें इंसान की जगह ले लेंगी, लेकिन कड़वा सच यह है कि एआई आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि वह व्यक्ति आपकी नौकरी ले लेगा जो एआई का बेहतर इस्तेमाल करना जानता है। इसलिए, आज के युवाओं को अपनी ऊर्जा और ध्यान का केंद्र केवल और केवल अपनी शिक्षा और करियर को बनाना चाहिए।   यहाँ शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि स्वयं को 'एआई-सक्षम' (AI-Ready) बनाना है। शिक्षा कभी बेकार नहीं जाती क्योंकि वह मानव मस्तिष्क को परिष्कृत करती है, लेकिन इस नए युग में शिक्षा का स्वरूप भी 'एआई युक्त' होना चाहिए। इसका मतलब है कि युवाओं को अपनी पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ डेटा विश्लेषण, एल्गोरिदम की समझ और डिजिटल साक्षरता को जोड़ना होगा। जब शिक्षा और तकनीक का यह मेल होगा, तभी युवा इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में न केवल टिक पाएंगे, बल्कि नेतृत्व भी कर पाएंगे। यह समय एकाग्रता का है, खुद को भविष्य के अनुकूल ढालने का है और अपनी मेधा को तकनीक के साथ संरेखित (Align) करने का है।   1. आधुनिक युग की मांग: एआई-युक्त शिक्षा आज वह समय बीत गया जब केवल किताबों को रटकर डिग्रियां हासिल करना काफी होता था। वर्तमान समय की मांग 'स्मार्ट लर्निंग' है। युवाओं को अपनी पारंपरिक शिक्षा में एआई को एक दुश्मन की तरह नहीं, बल्कि एक सहयोगी (Collaborator) की तरह शामिल करना चाहिए। एआई-युक्त शिक्षा का अर्थ है—जटिल विषयों को समझने के लिए डेटा का उपयोग करना, अपनी कमियों को पहचानने के लिए एआई टूल्स की मदद लेना और अपनी रचनात्मकता (Creativity) को तकनीक के साथ जोड़ना।   2. क्यों बेकार नहीं जाती शिक्षा? कहा जाता है कि "शिक्षा वह धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।" एआई के दौर में भी यह बात पूरी तरह सत्य है। एआई केवल वही कर सकता है जो उसे सिखाया गया है, लेकिन आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और समस्या समाधान (Problem Solving) केवल एक शिक्षित मानव मस्तिष्क ही कर सकता है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वह संस्कार और समझ है जो हमें मशीन से अलग बनाती है। आपकी पढ़ी हुई हर बात एआई को बेहतर निर्देश देने (Prompt Engineering) में काम आती है।   3. करियर के लिए एकाग्रता का महत्व आज के युवाओं के लिए भटकाव के साधन बहुत हैं, लेकिन करियर पर ध्यान केंद्रित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एआई हर उस काम को कर देगा जो दोहराव वाला (Repetitive) है। इसलिए, युवाओं को अपना ध्यान उन क्षेत्रों में लगाना चाहिए जहाँ भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) और रणनीतिक निर्णय की आवश्यकता होती है। जब आपका आधार मज़बूत होगा और आप अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहेंगे, तभी आप भविष्य की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे।   4. कौशल विकास (Skill Development) ही असली कुंजी है एआई के दौर में करियर बनाने के लिए युवाओं को तीन स्तरों पर काम करना होगा: अपस्किलिंग (Upskilling): अपने वर्तमान क्षेत्र में एआई टूल्स का उपयोग सीखें। री-स्किलिंग (Reskilling): भविष्य की बदलती जरूरतों के अनुसार नए हुनर सीखें। तकनीकी साक्षरता: कोडिंग न भी आए, तो भी एआई कैसे काम करता है, इसकी बुनियादी समझ होना अनिवार्य है।

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ठंड बढ़ने से झारखंड में मौसम हुआ सर्द

झारखंड के कई जिलों में पिछुआ हवाओं के कारण ठंड में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, पिछुआ हवाएं उत्तर से उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही हैं, जिनके कारण न्यूनतम तापमान में लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जिससे सुबह के समय काफी ठंडक बढ़ गई है। इस वर्ष सर्दी ने अपनी दस्तक समय से पहले दे दी है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही नवंबर के अंत से ठंड बढ़ने की चेतावनी दी थी। रातों में तापमान करीब 9 डिग्री तक गिर जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का असर महसूस किया जा रहा है।   राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को मौसम साफ और शुष्क रहा और मध्यम तेजी से हवा चली, जिससे ठंडी हवा का अनुभव हुआ। पिछले 24 घंटों में गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रांची में अधिकतम तापमान 24.6 और न्यूनतम 11.1 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि इस ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई का विशेष ख्याल रखा जाए ताकि वे प्रभावित न हों।   मौसम विभाग ने सूचना दी है कि बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे चक्रवात बनने की संभावना है। यह चक्रवात झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर असर डाल सकता है। इस कारण अगले दो दिनों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और बारिश या तेज हवाओं के चलते खेल आयोजन प्रभावित हो सकता है।राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अधिक महसूस होती है।

नवम्बर 27, 2025

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